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Chanakya Quotes in Hindi || chanakya niti | चाणक्य नीति

Chanakya Quotes in Hindi – महान विद्वान आचार्य चाणक्य के जीवन बदल देने वाले प्रेरणात्मक सुविचार आपके लिए लेकर आए हैं । शिक्षा ही एकमात्र ऐसी संपत्ति है जिसे आपसे कोई ना तो छीन सकता है और ना ही चुरा सकता है । इसी लिए आपके पास जितना ज्ञान है उस पर गर्व करे और ज्यादा से ज्यादा उसे सीखने की कोशिश करे । हर दिन कुछ नया सीखने की कोशिश करे और अपने ज्ञान को बढ़ाएं ।

चाणक्य हमेशा कहते है कि यदि मनुष्य शिक्षित है तो वह हर जगह इज्जत पाता है । चाणक्य के कुछ हिंदी सुविचार आपको पर्याप्त प्रेरणा दे सकते हैं । यह सुविचार चाणक्य के चाणक्य नीति से ली गई हैं । यह आपके जीवन में सकारात्मक रूप से बदलाव लाएगा ।

Chanakya Niti quotes

 

वन की अग्नि चन्दन की लकड़ी को भी जला देती है,
अर्थात दुष्ट व्यक्ति किसी का भी अहित कर सकते हैं।

 

अन्न के सिवाय
कोई दूसरा धन नहीं है।

 

भूख के समान कोई दूसरा शत्रु नहीं है।

 

सोने के साथ मिलकर चांदी भी सोने जैसी दिखाई पड़ती है
अर्थात सत्संग का प्रभाव मनुष्य पर अवश्य पड़ता है।

 

ईश्वर मूर्तियों में नहीं है। आपकी भावनाएँ ही आपका ईश्वर है।
आत्मा आपका मंदिर है।” ~ आचार्य चाणक्य

 

सबसे बड़ा गुरु मंत्र, अपने राज किसी को भी मत बताओ।
ये तुम्हे खत्म कर देगा।” ~ आचार्य चाणक्य

 

आदमी अपने जन्म से नहीं अपने कर्मों से महान होता है।” आचार्य चाणक्य

 

विद्या को चोर भी नहीं चुरा सकता।” ~ आचार्य चाणक्य

 

जैसे एक बछड़ा हज़ारो गायों के झुंड मे अपनी माँ के पीछे चलता है।
उसी प्रकार आदमी के अच्छे और बुरे कर्म उसके पीछे चलते हैं।” ~ आचार्य चाणक्य

 

“विद्या को चोर भी नहीं चुरा सकता।” ~ आचार्य चाणक्य

 

“सबसे बड़ा गुरु मंत्र, अपने राज किसी को भी मत बताओ।
ये तुम्हे खत्म कर देगा।” ~ आचार्य चाणक्य

 

“आदमी अपने जन्म से नहीं अपने कर्मों से महान होता है।” ~ आचार्य चाणक्य

 

“एक समझदार आदमी को सारस की तरह होश से काम लेना चाहिए और जगह,
वक्त और अपनी योग्यता को समझते हुए अपने कार्य को सिद्ध करना चाहिए।” ~ आचार्य चाणक्य

 

“ईश्वर मूर्तियों में नहीं है। आपकी भावनाएँ ही आपका ईश्वर है। आत्मा आपका मंदिर है।” ~ आचार्य चाणक्य

 

“पुस्तकें एक मुर्ख आदमी के लिए वैसे ही हैं,
जैसे एक अंधे के लिए आइना।” ~ आचार्य चाणक्य

 

“एक राजा की ताकत उसकी शक्तिशाली भुजाओं में होती है।
ब्राह्मण की ताकत उसके आध्यात्मिक ज्ञान में और एक औरत की ताक़त उसकी खूबसूरती,
यौवन और मधुर वाणी में होती है।” ~ आचार्य चाणक्य

 

“आग सिर में स्थापित करने पर भी जलाती है।
अर्थात दुष्ट व्यक्ति का कितना भी सम्मान कर लें,
वह सदा दुःख ही देता है।” ~ आचार्य चाणक्य

 

“गरीब धन की इच्छा करता है,
पशु बोलने योग्य होने की,
आदमी स्वर्ग की इच्छा करते हैं
और धार्मिक लोग मोक्ष की।” ~ आचार्य चाणक्य

 

“जो गुजर गया उसकी चिंता नहीं करनी चाहिए,
ना ही भविष्य के बारे में चिंतिंत होना चाहिए।
समझदार लोग केवल वर्तमान में ही जीते हैं।” ~ आचार्य चाणक्य

 

“संकट में बुद्धि भी काम नहीं आती है।” ~ आचार्य चाणक्य

 

“जो जिस कार्ये में कुशल हो उसे उसी कार्ये में लगना चाहिए।” ~ आचार्य चाणक्य

 

“किसी भी कार्य में पल भर का भी विलम्ब ना करें।” ~ आचार्य चाणक्य

 

Chanakya Quotes in Hindi

 

“दुर्बल के साथ संधि ना करें।” ~ आचार्य चाणक्य

 

“किसी विशेष प्रयोजन के लिए ही शत्रु मित्र बनता है।” ~ आचार्य चाणक्य

 

“संधि करने वालों में तेज़ ही संधि का होता है।” ~ आचार्य चाणक्य

 

“कच्चा पात्र कच्चे पात्र से टकराकर टूट जाता है।” ~ आचार्य चाणक्य

 

“संधि और एकता होने पर भी सतर्क रहें।” ~ आचार्य चाणक्य

 

“शत्रुओं से अपने राज्य की पूर्ण रक्षा करें।” ~ आचार्य चाणक्य

 

“शिकारपरस्त राजा धर्म और अर्थ दोनों को नष्ट कर लेता है।” ~ आचार्य चाणक्य

 

“भाग्य के विपरीत होने पर अच्छा कर्म भी दु:खदायी हो जाता है।” ~ आचार्य चाणक्य

 

“शत्रु की बुरी आदतों को सुनकर कानों को सुख मिलता है।” ~ आचार्य चाणक्य

 

“चोर और राज कर्मचारियों से धन की रक्षा करनी चाहिए।” ~ आचार्य चाणक्य

 

“जन्म-मरण में दुःख ही है।” ~ आचार्य चाणक्य

 

“ये मत सोचो की प्यार और लगाव एक ही चीज है।
दोनों एक दूसरे के दुश्मन हैं। ये लगाव ही है
जो प्यार को खत्म कर देता है।” ~ आचार्य चाणक्य

 

“दौलत, दोस्त ,पत्नी और राज्य दोबारा हासिल किये जा सकते हैं,
लेकिन ये शरीर दोबारा हासिल नहीं किया जा सकता।” ~ आचार्य चाणक्य

 

“पृथ्वी सत्य पे टिकी हुई है। ये सत्य की ही ताक़त है,
जिससे सूर्य चमकता है और हवा बहती है। वास्तव में सभी चीज़ें सत्य पे टिकी हुई हैं।” ~ आचार्य चाणक्य

 

“फूलों की खुशबू हवा की दिशा में ही फैलती है, लेकिन एक व्यक्ति की अच्छाई चारों तरफ फैलती है।” ~ आचार्य चाणक्य

 

“जो हमारे दिल में रहता है, वो दूर होके भी पास है।
लेकिन जो हमारे दिल में नहीं रहता, वो पास होके भी दूर है।” ~ आचार्य चाणक्य

 

“जैसे एक सूखा पेड़ आग लगने पे पुरे जंगल को जला देता है।
उसी प्रकार एक दुष्ट पुत्र पुरे परिवार को खत्म कर देता है।” ~ आचार्य चाणक्य

 

“जिस आदमी से हमें काम लेना है,
उससे हमें वही बात करनी चाहिए जो उसे अच्छी लगे।
जैसे एक शिकारी हिरन का शिकार करने से पहले मधुर आवाज़ में गाता है।” ~ आचार्य चाणक्य

 

“वो व्यक्ति जो दूसरों के गुप्त दोषों के बारे में बातें करते हैं,
वे अपने आप को बांबी में आवारा घूमने वाले साँपों की तरह बर्बाद कर लेते हैं।” ~ आचार्य चाणक्य

 

“एक आदर्श पत्नी वो है जो अपने पति की सुबह माँ की तरह सेवा करे
और दिन में एक बहन की तरह प्यार करे और रात में एक वेश्या की तरह खुश करे।” ~ आचार्य चाणक्य

 

“वो जो अपने परिवार से अति लगाव रखता है भय और दुख में जीता है।
सभी दुखों का मुख्य कारण लगाव ही है, इसलिए खुश रहने के लिए लगाव का त्याग आवशयक है।” ~ आचार्य चाणक्य

 

“एक संतुलित मन के बराबर कोई तपस्या नहीं है।
संतोष के बराबर कोई खुशी नहीं है। लोभ के जैसी कोई बिमारी नहीं है।
दया के जैसा कोई सदाचार नहीं है।” ~ आचार्य चाणक्य

 

“ऋण, शत्रु और रोग को समाप्त कर देना चाहिए।” ~ आचार्य चाणक्य

 

“वन की अग्नि चन्दन की लकड़ी को भी जला देती है,
अर्थात दुष्ट व्यक्ति किसी का भी अहित कर सकते हैं।” ~ आचार्य चाणक्य

 

Chanakya Quotes in Hindi 2021

 

सर्वशक्तिमान तीनो लोको के स्वामी श्री विष्णु भगवान को शीश नवाकर मै अनेक शास्त्रों से निकाले
गए राजनीति सार के तत्व को जन कल्याण हेतु समाज के सम्मुख रखता हूं। – चाणक्य नीति

 

इस राजनीति शास्त्र का विधिपूर्वक अध्ययन करके यह जाना जा सकता है
कि कौनसा कार्य करना चाहिए और कौनसा कार्य नहीं करना चाहिए।
यह जानकर वह एक प्रकार से धर्मोपदेश प्राप्त करता है
कि किस कार्य के करने से अच्छा परिणाम निकलेगा और किससे बुरा।
उसे अच्छे बुरे का ज्ञान हो जाता है। – चाणक्य नीति

 

लोगो की हित कामना से मै यहां उस शास्त्र को कहूँगा,
जिसके जान लेने से मनुष्य सब कुछ जान लेने वाला सा हो जाता है। – चाणक्य नीति

 

मूर्ख छात्रों को पढ़ाने तथा दुष्ट स्त्री के पालन पोषण से और दुखियों के साथ संबंध रखने से,
बुद्धिमान व्यक्ति भी दुःखी होता है। तात्पर्य यह कि मूर्ख शिष्य को कभी भी उपदेश नहीं देना चाहिए,
पतित आचरण करने वाली स्त्री की संगति करना तथा दुःखी मनुष्यो
के साथ समागम करने से विद्वान तथा भले व्यक्ति को दुःख ही उठाना पड़ता है। – चाणक्य नीति

 

दुष्ट स्त्री, छल करने वाला मित्र, पलटकर कर तीखा जवाब देने वाला नौकर
तथा जिस घर में सांप रहता हो, उस घर में निवास करने वाले गृहस्वामी
की मौत में संशय न करे। वह निश्चित मृत्यु को प्राप्त होता है। – चाणक्य नीति

 

विपत्ति के समय काम आने वाले धन की रक्षा करे। धन से स्त्री
की रक्षा करे और अपनी रक्षा धन और स्त्री से सदा करें। – चाणक्य नीति

 

आपत्ति से बचने के लिए धन की रक्षा करे क्योंकि पता नहीं कब आपदा आ जाए।
लक्ष्मी तो चंचल है। संचय किया गया धन कभी भी नष्ट हो सकता है। – चाणक्य नीति

 

जिस देश में सम्मान नहीं, आजीविका के साधन नहीं,
बन्धु-बांधव अर्थात परिवार नहीं और विद्या प्राप्त करने के
साधन नहीं, वहां कभी नहीं रहना चाहिए। – चाणक्य नीति

 

जहां धनी, वैदिक ब्राह्मण, राजा,नदी और वैद्य, ये पांच न हों,
वहां एक दिन भी नहीं रहना चाहियें। भावार्थ यह कि जिस जगह पर
इन पांचो का अभाव हो, वहां मनुष्य को एक दिन भी नहीं ठहरना चाहिए। – चाणक्य नीति

 

जहां जीविका, भय, लज्जा, चतुराई और त्याग की भावना,
ये पांचो न हों, वहां के लोगो का साथ कभी न करें। – चाणक्य नीति

 

नौकरों को बाहर भेजने पर, भाई-बंधुओ को संकट के समय तथा दोस्त को विपत्ति में और
अपनी स्त्री को धन के नष्ट हो जाने पर परखना चाहिए, अर्थात उनकी परीक्षा करनी चाहिए। – चाणक्य नीति

 

बीमारी में, विपत्तिकाल में,अकाल के समय, दुश्मनो से दुःख पाने या आक्रमण होने पर,
राजदरबार में और श्मशान-भूमि में जो साथ रहता है, वही सच्चा भाई अथवा बंधु है। – चाणक्य नीति

 

जो अपने निश्चित कर्मों अथवा वास्तु का त्याग करके,
अनिश्चित की चिंता करता है,
उसका अनिश्चित लक्ष्य तो नष्ट होता ही है,
निश्चित भी नष्ट हो जाता है। – चाणक्य नीति

 

बुद्धिहीन व्यक्ति को अच्छे कुल में जन्म लेने वाली कुरूप कन्या से भी विवाह कर लेना चाहिए,
परन्तु अच्छे रूप वाली नीच कुल की कन्या से विवाह नहीं करना चाहिए
क्योंकि विवाह संबंध समान कुल में ही श्रेष्ठ होता है। – चाणक्य नीति

 

लम्बे नाख़ून वाले हिंसक पशुओं, नदियों, बड़े-बड़े सींग वाले पशुओ,
शस्त्रधारियों, स्त्रियों और राज परिवारो का कभी विश्वास नहीं करना चाहिए। – चाणक्य नीति

 

विष से अमृत, अशुद्ध स्थान से सोना, नीच कुल वाले से विद्या और
दुष्ट स्वभाव वाले कुल की गुनी स्त्री को ग्रहण करना अनुचित नहीं है। – चाणक्य नीति

 

पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों का भोजन दुगना, लज्जा चौगुनी,
साहस छः गुना और काम (सेक्स की इच्छा) आठ गुना अधिक होता है। – चाणक्य नीति

 

Best Chanakya Quotes in Hindi

 

झूठ बोलना, उतावलापन दिखाना, छल-कपट, मूर्खता, अत्यधिक लालच करना, अशुद्धता और दयाहीनता,
ये सभी प्रकार के दोष स्त्रियों में स्वाभाविक रूप से मिलते है। – चाणक्य नीति

 

भोजन करने तथा उसे अच्छी तरह से पचाने की शक्ति हो तथा अच्छा भोजन समय पर प्राप्त होता हो,
प्रेम करने के लिए अर्थात रति-सुख प्रदान करने वाली उत्तम स्त्री के साथ संसर्ग हो,
खूब सारा धन और उस धन को दान करने का उत्साह हो,
ये सभी सुख किसी तपस्या के फल के समान है,
अर्थात कठिन साधना के बाद ही प्राप्त होते है। – चाणक्य नीति

 

जिसका पुत्र आज्ञाकारी हो, स्त्री उसके अनुसार चलने वाली हो,
अर्थात पतिव्रता हो, जो अपने पास धन से संतुष्ट रहता हो,
उसका स्वर्ग यहीं पर है। – चाणक्य नीति

 

पुत्र वे है जो पिता भक्त है। पिता वही है जो बच्चों का पालन-पोषण करता है।
मित्र वही है जिसमे पूर्ण विश्वास हो और स्त्री वही है
जिससे परिवार में सुख-शांति व्याप्त हो। – चाणक्य नीति

 

जो मित्र प्रत्यक्ष रूप से मधुर वचन बोलता हो और पीठ पीछे अर्थात अप्रत्यक्ष रूप से आपके सारे कार्यो में रोड़ा अटकाता हो,
ऐसे मित्र को उस घड़े के समान त्याग देना चाहिए जिसके भीतर विष भरा हो और ऊपर मुंह के पास दूध भरा हो। – चाणक्य नीति

 

बुरे मित्र पर अपने मित्र पर भी विश्वास नही करना चाहिए क्योंकि
कभी नाराज होने पर सम्भवतः आपका विशिष्ट मित्र भी
आपके सारे रहस्यों को प्रकट कर सकता है। – चाणक्य नीति

 

मन से विचारे गए कार्य को कभी किसी से नहीं कहना चाहिए,
अपितु उसे मंत्र की तरह रक्षित करके अपने (सोचे हुए) कार्य को करते रहना चाहिए। – चाणक्य नीति

 

निश्चित रूप से मूर्खता दुःखदायी है और यौवन भी दुःख देने वाला है
परंतु कष्टो से भी बड़ा कष्ट दूसरे के घर पर रहना है। – चाणक्य नीति

 

हर एक पर्वत में मणि नहीं होती और हर एक हाथी में मुक्तामणि नहीं होती।
साधु लोग सभी जगह नहीं मिलते और हर एक वन में चंदन के वृक्ष नहीं होते। – चाणक्य नीति

 

बुद्धिमान लोगो का कर्तव्य होता है की वे अपनी संतान को अच्छे कार्य-व्यापार
में लगाएं क्योंकि नीति के जानकार व सद्व्यवहार वाले व्यक्ति ही कुल में सम्मानित होते है। – चाणक्य नीति

 

जो माता-पिता अपने बच्चों को नहीं पढ़ाते, वे उनके शत्रु है।
ऐसे अपढ़ बालक सभा के मध्य में उसी प्रकार शोभा नहीं पाते,
जैसे हंसो के मध्य में बगुला शोभा नहीं पाता। – चाणक्य नीति

 

अत्यधिक लाड़-प्यार से पुत्र और शिष्य गुणहीन हो जाते है
और ताड़ना से गुनी हो जाते है। भाव यही है कि शिष्य और
पुत्र को यदि ताड़ना का भय रहेगा तो वे गलत मार्ग पर नहीं जायेंगे। – चाणक्य नीति

 

एक श्लोक, आधा श्लोक, श्लोक का एक चरण,
उसका आधा अथवा एक अक्षर ही सही या आधा
अक्षर प्रतिदिन पढ़ना चाहिए। – चाणक्य नीति

 

स्त्री का वियोग, अपने लोगो से अनाचार, कर्ज का बंधन, दुष्ट राजा की सेवा,
दरिद्रता और अपने प्रतिकूल सभा, ये सभी अग्नि
न होते हुए भी शरीर को दग्ध कर देते है। – चाणक्य नीति

 

नदी के किनारे खड़े वृक्ष, दूसरे के घर में गयी स्त्री,
मंत्री के बिना राजा शीघ्र ही नष्ट हो जाते है।
इसमें संशय नहीं करना चाहिए। – चाणक्य नीति

 

ब्राह्मणों का बल विद्या है, राजाओं का बल उनकी सेना है,
वेश्यो का बल उनका धन है और शूद्रों का बल छोटा बन कर रहना,
अर्थात सेवा-कर्म करना है। – चाणक्य नीति

 

वेश्या निर्धन मनुष्य को, प्रजा पराजित राजा को,
पक्षी फलरहित वृक्ष को व अतिथि उस घर को,
जिसमे वे आमंत्रित किए जाते है,
को भोजन करने के पश्चात छोड़ देते है। – चाणक्य नीति

 

ब्राह्मण दक्षिणा ग्रहण करके यजमान को,
शिष्य विद्याध्ययन करने के उपरांत अपने गुरु को
और हिरण जले हुए वन को त्याग देते है। – चाणक्य नीति

 

बुरा आचरण अर्थात दुराचारी के साथ रहने से,
पाप दॄष्टि रखने वाले का साथ करने से तथा अशुद्ध
स्थान पर रहने वाले से मित्रता करने वाला शीघ्र नष्ट हो जाता है। – चाणक्य नीति

 

मित्रता बराबर वालों में शोभा पाती है,नौकरी राजा की अच्छी होती है,
व्यवहार में कुशल व्यापारी और घर में सुंदर स्त्री शोभा पाती है। – चाणक्य नीति

 

Motivational Chanakya Quotes in Hindi

 

दोष किसके कुल में नहीं है ? कौन ऐसा है, जिसे दुःख ने नहीं सताया ? अवगुण किसे प्राप्त नहीं हुए ? सदैव सुखी कौन रहता है ? – चाणक्य नीति

 

मनुष्य का आचरण-व्यवहार उसके खानदान को बताता है, भाषण अर्थात उसकी बोली से देश का पता चलता है, विशेष आदर सत्कार से उसके प्रेम भाव का तथा उसके शरीर से भोजन का पता चलता है। – चाणक्य नीति

 

कन्या का विवाह अच्छे कुल में करना चाहिए। पुत्र को विध्या के साथ जोड़ना चाहिए। दुश्मन को विपत्ति में डालना चाहिए और मित्र को अच्छे कार्यो में लगाना चाहिए। – चाणक्य नीति

 

दुर्जन और सांप सामने आने पर सांप का वरण करना उचित है, न की दुर्जन का, क्योंकि सर्प तो एक ही बार डसता है, परन्तु दुर्जन व्यक्ति कदम-कदम पर बार-बार डसता है। – चाणक्य नीति

 

इसीलिए राजा खानदानी लोगो को ही अपने पास एकत्र करता है क्योंकि कुलीन अर्थात अच्छे खानदान वाले लोग प्रारम्भ में, मध्य में और अंत में, राजा को किसी दशा ने भी नहीं त्यागते। – चाणक्य नीति

 

प्रलय काल में सागर भी अपनी मर्यादा को नष्ट कर डालते है परन्तु साधु लोग प्रलय काल के आने पर भी अपनी मर्यादा को नष्ट नहीं होने देते। – चाणक्य नीति

 

मुर्ख व्यक्ति से बचना चाहिए। वह प्रत्यक्ष में दो पैरों वाला पशु है। जिस प्रकार बिना आँख वाले अर्थात अंधे व्यक्ति को कांटे भेदते है, उसी प्रकार मुर्ख व्यक्ति अपने कटु व अज्ञान से भरे वचनों से भेदता है। – चाणक्य नीति

 

रूप और यौवन से संपन्न तथा उच्च कुल में जन्म लेने वाला व्यक्ति भी यदि विध्या से रहित है तो वह बिना सुगंध के फूल की भांति शोभा नहीं पाता। – चाणक्य नीति

 

कोयल की शोभा उसके स्वर में है, स्त्री की शोभा उसका पतिव्रत धर्म है, कुरूप व्यक्ति की शोभा उसकी विद्वता में है और तपस्वियों की शोभा क्षमा में है। – चाणक्य नीति

 

किसी एक व्यक्ति को त्यागने से यदि कुल की रक्षा होती हो तो उस एक को छोड़ देना चाहिए। पूरे गांव की भलाई के लिए कुल को तथा देश की भलाई के लिए गांव को और अपने आत्म-सम्मान की रक्षा के लिए सारी पृथ्वी को छोड़ देना चाहिए। – चाणक्य नीति

 

उद्धयोग-धंधा करने पर निर्धनता नहीं रहती है। प्रभु नाम का जप करने वाले का पाप नष्ट हो जाता है। चुप रहने अर्थात सहनशीलता रखने पर लड़ाई-झगड़ा नहीं होता और वो जागता रहता है अर्थात सदैव सजग रहता है उसे कभी भय नहीं सताता। – चाणक्य नीति

 

अति सुंदर होने के कारण सीता का हरण हुआ, अत्यंत अहंकार के कारण रावण मारा गया,
अत्यधिक दान के कारण राजा बलि बांधा गया। अतः सभी के लिए अति ठीक नहीं है।
‘अति सर्वथा वर्जयते।’ अति को सदैव छोड़ देना चाहिए। – चाणक्य नीति

 

समर्थ को भार कैसा ? व्यवसायी के लिए कोई स्थान दूर क्या ?
विद्वान के लिए विदेश कैसा? मधुर वचन बोलने वाले का शत्रु कौन ? – चाणक्य नीति

 

एक ही सुगन्धित फूल वाले वृक्ष से जिस प्रकार सारा वन सुगन्धित हो जाता है,
उसी प्रकार एक सुपुत्र से सारा कुल सुशोभित हो जाता है। – चाणक्य नीति

 

आग से जलते हुए सूखे वृक्ष से सारा वन जल जाता है
जैसे की एक नालायक (कुपुत्र) लड़के से कुल का नाश होता है। – चाणक्य नीति

 

जिस प्रकार चन्द्रमा से रात्रि की शोभा होती है,
उसी प्रकार एक सुपुत्र, अर्थात साधु प्रकृति वाले पुत्र से कुल आनन्दित होता है। – चाणक्य नीति

 

शौक और दुःख देने वाले बहुत से पुत्रों को पैदा करने से क्या लाभ है ?
कुल को आश्रय देने वाला तो एक पुत्र ही सबसे अच्छा होता है। – चाणक्य नीति

 

पुत्र से पांच वर्ष तक प्यार करना चाहिए।
उसके बाद दस वर्ष तक अर्थात पंद्रह वर्ष की आयु तक
उसे दंड आदि देते हुए अच्छे कार्य की और लगाना चाहिए।
सोलहवां साल आने पर मित्र जैसा व्यवहार करना चाहिए।
संसार में जो कुछ भी भला-बुरा है, उसका उसे ज्ञान कराना चाहिए। – चाणक्य नीति

 

देश में भयानक उपद्रव होने पर, शत्रु के आक्रमण के समय,
भयानक दुर्भिक्ष(अकाल) के समय, दुष्ट का साथ होने पर,
जो भाग जाता है, वही जीवित रहता है। – चाणक्य नीति

 

जिसके पास धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष, इनमे से एक भी नहीं है,
उसके लिए अनेक जन्म लेने का फल केवल मृत्यु ही होता है। – चाणक्य नीति

 

जहां मूर्खो का सम्मान नहीं होता, जहां अन्न भंडार सुरक्षित रहता है,
जहां पति-पत्नी में कभी झगड़ा नहीं होता, वहां लक्ष्मी बिना बुलाए ही
निवास करती है और उन्हें किसी प्रकार की कमी नहीं रहती। – चाणक्य नीति

 

Chanakya Quotes in Hindi

 

बुद्धिमान व्यक्ति को ऐसे देश में कभी नहीं जाना चाहिए जहाँ :
रोजगार कमाने का कोई माध्यम ना हो,
जहा लोगों को किसी बात का भय न हो,
जहा लोगो को किसी बात की लज्जा न हो,जहा लोग बुद्धिमान न हो,
और जहाँ लोगो की वृत्ति दान धरम करने की ना हो।- आचार्य चाणक्य

 

धनवान व्यक्ति के कई मित्र होते है. उसके कई सम्बन्धी भी होते है.
धनवान को ही आदमी कहा जाता है और
पैसेवालों को ही पंडित कह कर नवाजा जाता है.- आचार्य चाणक्य

 

वासना के समान दुष्कर कोई रोग नहीं. मोह के समान कोई शत्रु नहीं.
क्रोध के समान अग्नि नहीं. स्वरुप ज्ञान के समान कोई बोध नहीं.- आचार्य चाणक्य

 

वह आदमी अभागा है जो अपने बुढ़ापे में पत्नी की मृत्यु देखता है.वह भी अभागा है
जो अपनी सम्पदा संबंधियों को सौप देता है.वह भी अभागा है जो खाने के लिए दुसरो पर निर्भर है.- आचार्य चाणक्य

 

वर्षा के जल के समान कोई जल नहीं.
खुदकी शक्ति के समान कोई शक्ति नहीं.
नेत्र ज्योति के समान कोई प्रकाश नहीं.
अन्न से बढ़कर कोई संपत्ति नहीं.- आचार्य चाणक्य

 

एक विद्यार्थी पूर्ण रूप से निम्न लिखित बातो का त्याग करे.
१. काम २. क्रोध ३. लोभ ४. स्वादिष्ट भोजन की अपेक्षा. ५. शरीर का शृंगार
६. अत्याधिक जिज्ञासा ७. अधिक निद्रा
८. शरीर निर्वाह के लिए अत्याधिक प्रयास.- आचार्य चाणक्य

 

एक व्यक्ति को चारो वेद और सभी धर्मं शास्त्रों का ज्ञान है.
लेकिन उसे यदि अपने आत्मा की अनुभूति नहीं हुई तो वह उसी चमचे के समान है
जिसने अनेक पकवानों को हिलाया लेकिन किसी का स्वाद नहीं चखा.- आचार्य चाणक्य

 

वे लोग जो इस दुनिया में सुखी है. जो अपने संबंधियों के प्रति उदार है.
अनजाने लोगो के प्रति सह्रदय है. अच्छे लोगो के प्रति प्रेम भाव रखते है.
नीच लोगो से धूर्तता पूर्ण व्यवहार करते है. विद्वानों से कुछ नहीं छुपाते.
दुश्मनों के सामने साहस दिखाते है.
बड़ो के प्रति विनम्र और पत्नी के प्रति सख्त है.- आचार्य चाणक्य

 

जब प्रलय का समय आता है तो समुद्र भी अपनी मयारदा छोड़कर किनारों को छोड़ अथवा तोड़ जाते है,
लेकिन सज्जन पुरुष प्रलय के सामान भयंकर
आपत्ति अवं विपत्ति में भी आपनी मर्यादा नहीं बदलते.- आचार्य चाणक्य

 

वह जो हमारे मन में रहता हमारे निकट है. हो सकता है
की वास्तव में वह हमसे बहुत दूर हो. लेकिन वह व्यक्ति
जो हमारे निकट है लेकिन हमारे मन में नहीं है
वह हमसे बहोत दूर है.- आचार्य चाणक्य

 

अनेक व्यक्ति जो एक ही गर्भ से पैदा हुए है या एक ही नक्षत्र में पैदा हुए है
वे एकसे नहीं रहते. उसी प्रकार जैसे बेर के झाड के सभी बेर एक से नहीं रहते.- आचार्य चाणक्य

 

मूर्खो के साथ मित्रता नहीं रखनी चाहिए उन्हें त्याग देना ही उचित है,
क्योंकि प्रत्यक्ष रूप से वे दो पैरों वाले पशु के सामान हैं,
जो अपने धारदार वचनो से वैसे ही हदय को छलनी करता है
जैसे अदृश्य काँटा शारीर में घुसकर छलनी करता है .- आचार्य चाणक्य

 

कोयल की सुन्दरता उसके गायन मे है. एक स्त्री की सुन्दरता उसके अपने पिरवार के प्रति समर्पण मे है.
एक बदसूरत आदमी की सुन्दरता उसके ज्ञान मे है
तथा एक तपस्वी की सुन्दरता उसकी क्षमाशीलता मे है.- आचार्य चाणक्य

 

जो अपने समाज को छोड़कर दुसरे समाज को जा मिलता है,
वह उसी राजा की तरह नष्ट हो जाता है
जो अधर्म के मार्ग पर चलता है.- आचार्य चाणक्य

 

वह व्यक्ति क्यों मुक्ति को नहीं पायेगा जो निम्न लिखित परिस्थितियों में जो उसके मन की अवस्था होती है उसे कायम रखता है…
जब वह धर्म के अनुदेश को सुनता है. जब वह स्मशान घाट में होता है.
जब वह बीमार होता है.- आचार्य चाणक्य

 

ऊख, जल, दूध, पान, फल और औषधि इन वस्तुओं के भोजन
करने पर भी स्नान दान आदि क्रिया कर सकते हैं।- आचार्य चाणक्य

 

सत्य मेरी माता है. अध्यात्मिक ज्ञान मेरा पिता है.
धर्माचरण मेरा बंधू है. दया मेरा मित्र है. भीतर की शांति मेरी पत्नी है.
क्षमा मेरा पुत्र है. मेरे परिवार में ये छह लोग है.- आचार्य चाणक्य

 

हर पर्वत पर माणिक्य नहीं होते, हर हाथी के सर पर मणी नहीं होता,
सज्जन पुरुष भी हर जगह नहीं होते और हर वन मे
चन्दन के वृक्ष भी नहीं होते हैं।- आचार्य चाणक्य

 

तात, यदि तुम जन्म मरण के चक्र से मुक्त होना चाहते हो तो जिन विषयो के पीछे
तुम इन्द्रियों की संतुष्टि के लिए भागते फिरते हो उन्हें ऐसे त्याग दो जैसे तुम विष
को त्याग देते हो. इन सब को छोड़कर हे तात तितिक्षा,
ईमानदारी का आचरण, दया, शुचिता और
सत्य इसका अमृत पियो.- आचार्य चाणक्य

 

जो लोग दिखने में सुन्दर है, जवान है, ऊँचे कुल में पैदा हुए है,
वो बेकार है यदि उनके पास विद्या नहीं है. वो तो पलाश के
फूल के समान है जो दिखते तो अच्छे है पर महकते नहीं.- आचार्य चाणक्य

 

गरीबी पर धैर्य से मात करे. पुराने वस्त्रो को स्वच्छ रखे.
बासी अन्न को गरम करे.- आचार्य चाणक्य

 

जो व्यक्ति आर्थिक व्यवहार करने में, ज्ञान अर्जन करने में,
खाने में और काम-धंदा करने में शर्माता नहीं है
वो सुखी हो जाता है.- आचार्य चाणक्य

 

Chanakya Quotes in English

 

Humbly bowing down before the almighty Lord Sri Vishnu, the Lord of the three worlds, I recite maxims of the science of political ethics (niti) selected from the various satras (scriptures).

 

That man who by the study of these maxims from the satras acquires a knowledge of the most celebrated principles of duty, and understands what ought and what ought not to be followed, and what is good and what is bad, is most excellent.

 

Therefore with an eye to the public good,
I shall speak that which, when understood,
will lead to an understanding of things in their proper perspective.

 

Even a pandit comes to grief by giving instruction to a foolish disciple,
by maintaining a wicked wife,
and by excessive familiarity with the miserable.

 

A wicked wife, a false friend,
a saucy servant and living in a house with
a serpent in it is nothing but death.

 

One should save his money against hard times,
save his wife at the sacrifice of his riches,
but invariably one should save his soul
even at the sacrifice of his wife and riches.

 

Save your wealth against future calamities. Do not say,
What fear has a rich man, of calamity?
When riches begin to forsake one even
the accumulated stock dwindles away.

 

Do not inhabit a country where you are not respected,
cannot earn your livelihood, have no friends,
or cannot acquire knowledge.

 

Do not stay for a single day where there are not these five persons:
a wealthy man, a brahmin well versed in Vedic lore,
a king, a river, and a physician.

 

Wise men should never go into a country where there are no means of earning one’s livelihood, where the people have no dread of anybody, have no sense of shame, no intelligence, or a charitable disposition.

 

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